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आश्रम की विशेषताएँ



1. माता भगवती जगत् जननी दुर्गा जी की ममतामयी कृपा व आशीर्वाद से इस आश्रम की स्थापना मैंने दिनांक 23-01-1997 दिन गुरुवार को की है। इस दिन महत्त्वपूर्ण प्रभावक योगों व क्षणों में मैंने स्वतः भूमि पूजन किया और माँ का मूलध्वज उसके विशिष्ट मंत्रों से अभिमंत्रित करके आश्रम के मूल स्थल पर स्थापित किया है। उसके बाद लगातार आश्रम निर्माण कार्य के साथ ही आश्रम के कण-कण को चैतन्य करने हेतु मेरी सतत साधनायें व क्रियायंे चल रही हैं। विश्वशांति की स्थापना एवं जनकल्याण के कार्य करने व जन-जन में माँ की चेतना जाग्रत् करने के लिए आश्रम में दिनांक 15-04-1997 दिन मंगलवार 11 बजे सुबह शुभ मुहूर्त में ‘‘श्री दुर्गा चालीसा‘‘ का अखण्ड पाठ अनन्तकाल के लिए प्रारम्भ कराया गया है, जो सतत चल रहा है।
2. आश्रम निर्माण लगभग 100 एकड़ के क्षेत्रफल में हो रहा है।
3. आश्रम स्थल वर्तमान के दूषित वातावरण के प्रभाव से मुक्त है एवं अनेकों दिव्य पहाड़ियों से घिरा हुआ नदी के तट पर स्थित है।
4. समय के साथ शेष सौ महाशक्तियज्ञ एवं सैकड़ों दुर्लभ साधनाएं सम्पन्न करके आश्रम को पूर्ण चैतन्य तपस्थली में परिवर्तित किया जायेगा।
5. यहां पर विभिन्न प्रकार के फलदार वृक्ष लगाये जा रहे हैं।
6. आश्रम में 1000 लोगों के एक साथ योग साधना करने हेतु पूर्ण सुविधायुक्त ‘‘योग साधना भवन‘‘ का निर्माण किया जायेगा।
7. आश्रम के मध्य में अखण्ड साधना के माध्यम से योगाग्नि से प्रज्वलित पंचज्योति स्थापित की जायेगी, जिसका सुरक्षित भव्य ‘‘पंचज्योति‘‘ मंदिर होगा।
8. पंचज्योति मंदिर व शक्ति मंदिर के चारों तरफ दस महाविद्याओं के मंदिर होंगे तथा अन्य सभी देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित होंगे।
9. भगवान् शंकर का विशिष्ट मंदिर भी निर्मित होगा, जिसमें ’’पारद शिवलिंग’’ की स्थापना की जाएगी।
10. पूर्ण विधि-विधान के साथ अनेक महामंत्रों का शिलालेख होगा।
11. महाशक्तियज्ञ स्थल के चारों तरफ एक शक्ति सरोवर का निर्माण किया जाएगा, जिस पर बाहर से मंदिर में जाने हेतु पुल निर्मित होगा।
12. सरोवर के चारों तरफ पर्याप्त मैदान होगा।
13. एक सिद्ध बगीचा होगा, जिसमें साधना सिद्धि हेतु सहायक फलदार वृक्ष होंगे।
14. इस सिद्ध बगीचे से पंचज्योति मंदिर तक सुरंग मार्ग बनाया जायेगा।
15. सिद्ध बगीचे में पाँच अलौकिक गुफाएं होंगी, जिनमंे बैठकर साधक दिव्य साधनाएं सम्पन्न कर सकेंगे।
16. लोगों के साधना करने के लिए सैकड़ों पूर्ण सुविधायुक्त साधनाकक्ष बनाए जायेंगे।
17. बाहर से पहुँचने वाले लाखों भक्तों के ठहरने का एकान्त स्थान बनाया जायेगा, जिस क्रम में कुछ भक्तों के ठहरने हेतु निर्माण कार्य कराया जा चुका है।
18. एक जड़ी-बूटियों का उद्यान भी होगा।
19. एक बड़े स्तर की पवित्र गौशाला की स्थापना की जा चुकी है।
20. भारतीय गूढ़ विद्याओं का संग्रहालय होेगा।
21. एक ज्ञानदीप विद्यालय होगा।
22. एक पूर्ण सुविधायुक्त अस्पताल होगा।
23. एक 108 कुण्डीय यज्ञशाला निर्मित होगी।
24. आश्रम में शक्ति सरोवर के चारों तरफ सभी शक्तियों के सैकड़ों मंदिरों की स्थापना की जाएगी तथा एक विशाल ’’शक्ति मंदिर’’ का निर्माण कराया जायेगा, जहाँ पर ध्यानयोग के माध्यम से प्राणप्रतिष्ठा करके माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी के मूल स्वरूप की स्थापना होगी। यह विश्व की एकमात्र पूर्ण चैतन्य जाग्रत् मूर्ति होगी।

जय गुरुवर की ! जय माता की !


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